पवनसुत /हनुमान जी के वानर राज केसरी और माता अंजना थे, लेकिन उन्हें पवन देव (वायु) का पुत्र भी कहा जाता है,हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, क्योंकि शिव के अंश से ही उनका जन्म हुआ था

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हनुमान जी के वानर राज केसरी और माता अंजना थे, लेकिन उन्हें पवन देव (वायु) का पुत्र भी कहा जाता है क्योंकि पवन देव ने ही अंजना को हनुमान जी को जन्म देने में सहायता की थी, और वे भगवान शिव के अंश के रूप में भी प्रकट हुए थे, इसलिए उनके तीन पिता माने जाते हैं: केसरी (पालन-पोषण करने वाले), पवन देव (जो गर्भधारण में सहायक थे), और भगवान शिव (जिनके अंश से जन्म हुआ). 

केसरी: वह हनुमान जी के पालक पिता थे और वानर सेना के प्रमुख थे, जिनसे माता अंजना का विवाह हुआ था. 

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पवन देव (वायु): अंजना तपस्या कर रही थीं, तब पवन देव ने भगवान शिव के अंश को अंजना के गर्भ में पहुँचाया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ, इसलिए वे पवन पुत्र कहलाए. 
भगवान शिव: हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, क्योंकि शिव के अंश से ही उनका जन्म हुआ था, इसलिए उन्हें ‘शंकर सुवन’ भी कहते हैं. 
केसरी उनके सांसारिक पिता थे, लेकिन पवन देव और शिव जी का भी उनसे गहरा संबंध है, जिसके कारण उन्हें कई बार “तीन पिता” वाला कहा जाता

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