तमिलनाडु के त्रिचुरापल्ली में बना पूल 2000साल पुराना
इतिहास और निर्माण की कहानी
राजा करिकालन का विजन: इस अद्भुत बांध का निर्माण लगभग 2,000 साल पहले (करीब दूसरी शताब्दी ईस्वी में) चोल वंश के महान राजा करिकालन चोलन ने करवाया था।
बाढ़ की समस्या: उस समय हर साल कावेरी नदी में बाढ़ आती थी, जिससे आसपास की उपजाऊ फसलें नष्ट हो जाती थीं और पानी बिना किसी उपयोग के समुद्र में बह जाता था। राजा करिकालन ने इस पानी को रोकने और सही दिशा देने की योजना बनाई।बगैर तराशे पत्थरों का चमत्कार: राजा के इंजीनियरों ने बहते हुए पानी के बीच बिना किसी चूने या सीमेंट के, सिर्फ भारी और बिना तराशे पत्थरों को आपस में जोड़कर यह मजबूत बांध खड़ा कर दिया। यह पत्थर पानी के बहाव के साथ और कसकर बैठ जाते हैं।
आकार: यह बांध लगभग 1,080 फीट लंबा (करीब 329 मीटर), 18 से 20 फीट ऊंचा और 60 फीट चौड़ा है।
इसका काम और महत्व
पानी का बंटवारा: इस बांध का मुख्य काम कावेरी नदी के पानी को नियंत्रित करना और उसे उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र की ओर मोड़ना था, ताकि धान की खेती के लिए भरपूर पानी मिल सके।
ब्रिटिश काल में सुधार: 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश सिंचाई इंजीनियर सर ऑर्थर कॉटन इस प्राचीन इंजीनियरिंग को देखकर हैरान रह गए थे। उन्होंने इस बांध की मजबूती को बनाए रखते हुए इसमें कुछ आधुनिक सुधार किए और इसके पास ही एक और निचला एनीकट (Lower Anicut) बनवाया।
आज की स्थिति: 20 सदियों (लगभग 2000 वर्षों) बीत जाने के बाद भी यह प्राचीन बांध आज पूरी क्षमता से काम कर रहा है और तमिलनाडु के लाखों एकड़ खेतों की प्यास बुझा रहा है।











