600 साल पुरानी उस रहस्यमयी किताब का नाम ‘वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट’ (Voynich Manuscript) है, जिसे आज तक दुनिया का कोई भी भाषाविद्, इतिहासकार या सुपरकंप्यूटर पूरी तरह से पढ़ या समझ नहीं पाया है।
नाम और स्थान: इसे अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी (Yale University) की बीनेक रेयर बुक एंड मैन्युस्क्रिप्ट लाइब्रेरी (Beinecke Rare Book and Manuscript Library) में ‘MS 408’ के रूप में सुरक्षित रखा गया है। 1912 में एक दुर्लभ पुस्तक विक्रेता विल्फ्रेड वॉयनिच (Wilfrid Voynich) ने इसे खरीदा था, जिसके बाद इसका नाम वॉयनिच मैन्युस्क्रिप्ट पड़ा।

कार्बन डेटिंग: रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला है कि इस किताब के पन्ने (चर्मपत्र/Vellum) 1404 से 1438 के बीच (यानी करीब 600 साल पुराने) बनाए गए थे।
किताब की बनावट: यह लगभग 240 पन्नों की एक हस्तलिखित (Handwritten) किताब है।
अजीबोगरीब चित्र: इस किताब में ऐसे पेड़-पौधे और फूल बने हैं जो असल दुनिया में कहीं नहीं पाए जाते। इसके अलावा इसमें खगोलीय चार्ट, तारे, राशि चक्र के निशान और हरे पानी के टब में नहाती हुई नंगी महिलाओं के चित्र हैं।

अज्ञात लिपि: इसमें इस्तेमाल की गई भाषा और लिपि दुनिया की किसी भी ज्ञात भाषा (जैसे लैटिन, ग्रीक या अन्य पुरानी भाषा) से मेल नहीं खाती।
विद्वानों में इस बात को लेकर बहस है कि यह किताब किसी भूली हुई सभ्यता का ज्ञान है, कोई गुप्त कोड है, या फिर सैकड़ो साल पुराना कोई बहुत बड़ा मज़ाक या फर्जीवाड़ा है।











