टगर (चांदनी) एक सदाबहार, सुगंधित सफेद फूल वाला झाड़ीदार पौधा है, जो भारत में पूजा के लिए बहुत लोकप्रिय है। इसके फूल ‘पिनव्हील’ (चरखी) के आकार के होते हैं और यह वसंत से गर्मियों तक सबसे ज्यादा खिलता है। यह कम देखभाल में उगने वाला एक बहुत ही सुंदर पौधा है।
तगर का फूल मुख्य रूप से भगवान ब्रह्मा को अर्पित किया जाता है, क्योंकि यह श्वेत रंग का होता है और उन्हें प्रिय है। यह फूल पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और इसे भगवान शिव की पूजा में भी चढ़ाया जा सकता है।

प्रमुख देवता: ब्रह्मा जी।
अन्य मान्यता: कुछ स्थानों पर इसे भगवान शिव को भी अर्पित किया जाता है।

विशेषता: तगर का फूल पीले-सफेद रंग का होता है और सुगंधित होता है।
टगर एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो मुख्य रूप से अनिद्रा (नींद न आना), चिंता, तनाव, और जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए जानी जाती है। इसके शांत करने वाले गुण नसों को आराम देते हैं और मांसपेशियों के दर्द व ऐंठन में राहत प्रदान करते हैं। इसकी जड़ का उपयोग पाचन समस्याओं और वातज रोगों में भी बहुत फायदेमंद होता है।
टगर के प्रमुख औषधीय गुण और उपयोग:
अनिद्रा और बेचैनी में (Insomnia): तगर को प्राकृतिक शामक (Sedative) माना जाता है, जो दिमाग को शांत कर गहरी नींद लाने में मदद करता है।
तनाव और चिंता कम करना: यह वात दोष को शांत करता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता, और बेचैनी को दूर करने में सहायता मिलती है।
जोड़ों का दर्द और सूजन (Arthritis): टगर की जड़ों में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द और वात संबंधी विकारों में राहत देते हैं।
सिरदर्द और माइग्रेन: मांसपेशियों को आराम देने के कारण, यह तनाव से होने वाले सिरदर्द और माइग्रेन को कम कर सकता है।
पाचन और अन्य लाभ: यह पाचन सुधारने, मिर्गी के लक्षणों को कम करने, और रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौरान होने वाली समस्याओं में भी उपयोगी हो सकता है।
सावधानी:
तगर का सेवन हमेशा चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें। लंबे समय तक उपयोग से रक्तचाप कम हो सकता है, इसलिए चिकित्सकीय देखरेख जरूरी है।
नोट: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी जड़ी-बूटी का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श लें।












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