WAR LIVE // मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर चुने गए,रूस और चीन दोनों ही ईरान को रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य रूप से समर्थन देते हैं।1979 के बाद पहली बार, ईरान खानदानी शासन की ओर बढ़ रहा है।

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मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर चुने गए!

1979 के बाद पहली बार, ईरान खानदानी शासन की ओर बढ़ रहा है। मोजतबा ने युद्ध के समय हुए एक सीक्रेट वोट के बाद अपने पिता, अली खामेनेई की जगह ली है।

  • बासिज पर अपनी मज़बूत पकड़ और IRGC के साथ गहरे रिश्तों के लिए जाने जाते हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार Iran के मीडिया में यह दावा किया गया है कि United States के शक्तिशाली बम GBU‑43/B MOAB के इस्तेमाल की चेतावनी दी गई है।

इस बम को आमतौर पर “मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स (MOAB)” कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बमों में से एक माना जाता है और इसका उपयोग बड़े इलाके में भारी विस्फोट और दबाव पैदा करने के लिए किया जाता है।


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अगर इस तरह का बम इस्तेमाल किया जाता है तो यह बहुत बड़े क्षेत्र में विनाशकारी असर डाल सकता है। इसलिए इसकी चर्चा सामने आने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

यह जानकारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
लेबनान का कहना है कि देश पर इज़राइली हमलों के एक हफ्ते के भीतर 5 लाख से अधिक लोग जबरन विस्थापित हो गए हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, लगातार हो रहे हमलों और बमबारी के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कई परिवार अस्थायी शिविरों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में रहने को मजबूर हैं।

लेबनान सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है।

Israel Defense Forces (इज़राइली सेना) के एक प्रवक्ता ने कहा है कि सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के सदस्यों के खिलाफ हमले जारी रखेगी।

प्रवक्ता ने संकेत दिया कि मौजूदा अमेरिका-इज़राइल की सैन्य कार्रवाई “लंबे समय तक जारी रह सकती है।”

उन्होंने कहा कि इज़राइली सेना क्षेत्र में अपने लक्ष्यों के खिलाफ अभियान जारी रखेगी और आवश्यक होने पर आगे भी कार्रवाई करती रहेगी।
ट्रंप की सोच बड़ी गलती थी, ईरान कुछ दिनों में नहीं झुकेगा: ईरानी संसद स्पीकर

तेहरान। Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह मानकर “बड़ी गलती” की कि ईरान कुछ ही दिनों में दबाव के आगे झुक जाएगा।
ईरानी संसद के स्पीकर ने कहा कि तेहरान किसी भी दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा और देश अपने हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान लंबे समय तक भी मुकाबला करने के लिए तैयार है और बाहरी दबाव से उसकी नीतियां नहीं बदलेंगी।

रूस और चीन दोनों ही ईरान को रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य रूप से समर्थन देते हैं।

यह गठबंधन मुख्य रूप से अमेरिका और पश्चिमी प्रभाव को कम करने के लिए है। रूस ने हाल ही में ईरान के नए नेतृत्व (मुजतबा खामेनेई) को खुला समर्थन दिया है, जबकि चीन ईरान से तेल खरीद और बड़े निवेश के जरिए मदद करता है। 


ईरान को चीन-रूस समर्थन के मुख्य बिंदु:
सैन्य और इंटेलिजेंस सहयोग: रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस और चीन ने ईरान को खुफिया जानकारी (Intelligence) और हथियार प्रणालियों में मदद की है। रूस ईरान के साथ रक्षा सौदों के तहत उन्हें तकनीकी मदद दे रहा है।
आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन: चीन ईरान का सबसे बड़ा आर्थिक भागीदार बना हुआ है, जो ईरान के तेल के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों के विरोध में खड़े होते हैं।
रणनीतिक साझेदारी: रूस और ईरान के बीच प्रगाढ़ संबंध हैं, वे सीरिया और यूक्रेन जैसे संघर्षों में सहयोगी रहे हैं। रूस ने ईरान के सर्वोच्च नेता को अपनी एकजुटता का आश्वासन दिया है।
चीन की भूमिका: चीन ईरान में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है और अमेरिका विरोधी धड़े में ईरान का समर्थन करता है, लेकिन वह पश्चिमी देशों से सीधे टकराव से बचता है। 

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