WAR LIVE //ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्पेशल फोर्स के टॉप जनरल इस्माइल कानी को मार दिया है। और तेहरान में एक सैन्य ठिकाने पर इजराइल का हमला ,ईरान ने इस पूरे इलाक़े में अपनी फ़ौजी पकड़ का दायरा बढ़ा लिया है

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ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की स्पेशल फोर्स के टॉप जनरल इस्माइल कानी को मार दिया है। कानी पर इजरायल की सीक्रेट सर्विस मोसाद के लिए जासूसी का आरोप है। अरब मीडिया से आ रही रिपोर्ट के अनुसार, कानी ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धोखा दिया था। कानी ईरान की एलीट कुद्स फोर्स के चीफ थे, जो विदेशों में ईरान की प्रॉक्सी को तैयार करने के लिए कुख्यात है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानी इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ मिले हुए थे। अभी तक ईरान की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

कानी पर शक की सुई बीते सप्ताह में घूमी, जब वे सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या करने वाले हमले में चमत्कारिक ढंग से बच गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी जनरल इसके पहले भी हत्या की कोशिशों से बच गए थे। UAE के द नेशनल ने अपनी रिपोर्ट में बिना कन्फर्म सोर्स के हवाले से बताया कि इस्माइल कानी को मोसाद से जुड़े होने के शक में मार दिया गया है।

ईरान की सेना की शाखा Islamic Revolutionary Guard Corps ने कड़ा बयान देते हुए कहा है अब क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली सैन्य ठिकानों को और विनाशकारी हमलों का निशाना बनाया जाएगा।

IRGC के बयान के अनुसार, अगर क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो United States और Israel के ठिकानों पर बड़े स्तर पर जवाबी हमले किए जा सकते हैं।

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ईरान की राजधानी तेहरान में एक सैन्य ठिकाने पर इजराइल का हमला कहा जा रहा है कि यह हमला IRGC के अड्डे पर किया गया, जिसके बाद शहर के कुछ हिस्सों में धुआँ और अफरा-तफरी देखी गई।
इज़राइल के पत्रकार अलोन मिज़राही की दिलचस्प टिप्पणी

“हम इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देख रहे हैं। सबकी उम्मीदों के ख़िलाफ़, ईरान इस वक़्त अमेरिकी ठिकानों को इतनी गहराई और इतने निर्णायक तरीक़े से तबाह कर रहा है कि दुनिया अभी उसे समझने के लिए तैयार ही नहीं है।

सिर्फ़ चार दिनों में ईरान ने इस पूरे इलाक़े में अपनी फ़ौजी पकड़ का दायरा बढ़ा लिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे क़ीमती और सबसे महंगे फ़ौजी ठिकानों, साधनों और उपकरणों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है। बहरीन, कुवैत, क़तर और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकाने दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में गिने जाते हैं। इन्हें बनाने में कई दशकों में खरबों डॉलर खर्च हुए हैं। यानी तीस साल से ज़्यादा के सैन्य ख़र्च का बड़ा हिस्सा अब धुएं में उड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

हम देख रहे हैं कि करोड़ों डॉलर की क़ीमत वाले रडार एक ही पल में नष्ट हो रहे हैं। पूरी की पूरी सैन्य छावनियां खाली कर दी गयी हैं, कुछ जला दी गयी हैं और कई पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। मेरे ज्ञान के मुताबिक़, अमेरिका को अपने पूरे इतिहास में ऐसी तबाही कभी नहीं झेलनी पड़ी, शायद पर्ल हार्बर के हमले को छोड़ दें, मगर वह भी एक ही हमला था।

किसी भी सामान्य युद्ध में किसी दुश्मन ने अमेरिकी सेना के साथ वह नहीं किया जो ईरान इस समय कर रहा है। यह बात यक़ीन से परे लगती है। हालात इतने ख़राब हैं कि इस युद्ध से जुड़ी नयी जानकारी लगभग पूरी तरह सेंसरशिप के पीछे छिपा दी गयी है। आपने ग़ौर किया होगा कि हर दिन हमें कम से कम जानकारी दिखायी जा रही है।

पैंतीस साल पहले पहले इराक़ युद्ध के दौरान हमें लगातार वीडियो फुटेज दिखाये जाते थे। उस समय ‘स्मार्ट बम’ और कैमरे नयी चीज़ थे, फिर भी हर रात युद्ध के दृश्य टीवी पर दिखते थे। आज हालात यह हैं कि हमें लगभग कोई वीडियो दिखाई ही नहीं देता।

ज़रा समझिए। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त, जिसकी वायु शक्ति भी दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती है, चार दिनों से हमले की स्थिति में है। दावा किया जा रहा है कि वह ईरानी रक्षा पंक्तियों को तोड़ रही है, लेकिन हमें कहीं भी ईरान के आसमान पर अमेरिकी वर्चस्व का कोई सबूत नहीं दिखता। तेहरान या ईरान के किसी भी हिस्से के ऊपर उड़ते अमेरिकी विमानों की फुटेज कहां है?

अमेरिकी सैनिक ईरान की ज़मीन पर कदम रखने का ख़्वाब भी नहीं देख सकते। इस युद्ध की बेबसी का अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि चौथे ही दिन ट्रंप प्रशासन की ओर से अजीबोग़रीब सुझाव सामने आने लगे हैं। वे कह रहे हैं कि फ़ारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल के जहाज़ों को सैन्य सुरक्षा दी जाए। आप सोच भी क्या रहे हैं? आप अमेरिकी जहाज़ों को हज़ारों ईरानी मिसाइलों की मारक सीमा में भेजना चाहते हैं? इस वक़्त कोई भी जहाज़ हॉर्मुज़ के जलडमरूमध्य से सुरक्षित नहीं गुजर सकता।

ईरान ने दशकों तक इसकी तैयारी की है। अब कुछ लोग यह बात कर रहे हैं कि कुर्द मिलिशिया को हथियार देकर ईरान पर हमला कराया जाए। यह कैसी बात है? क्या आपने ईरान का नक़्शा देखा है? लगता है ट्रंप प्रशासन ने कभी ईरान का नक़्शा देखा ही नहीं। आपको पता है वह कितना विशाल देश है? आप कहते हैं ईरान पर हमला कर दो। क्या दस हज़ार लड़ाकों की मिलिशिया ईरान पर क़ब्ज़ा कर लेगी? पचास हज़ार? या एक लाख? ईरान उन्हें निगल जाएगा।

अमेरिका और इस्राइल यह युद्ध पहले ही हार चुके हैं। वे बम गिराकर लाखों आम लोगों को मार सकते हैं, इमारतों को उड़ा सकते हैं, लेकिन वे यह युद्ध नहीं जीतेंगे। ईरान का सैन्य ढांचा और हथियार पूरे देश में ज़मीन के बहुत गहरे नीचे बने हुए हैं। अमेरिकियों के लिए, और निश्चित ही इस्राइलियों के लिए, वहां तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है।

उन्होंने ऐसा सिलसिला शुरू कर दिया है जिसे वे ख़त्म करने की ताक़त नहीं रखते। जब यह सब ख़त्म होगा, तो अमेरिका फिर कभी पश्चिमी एशिया में उसी तरह वापस नहीं आ पाएगा। मध्य पूर्व में अमेरिकी मौजूदगी नहीं बचेगी। मैं यह बात पूरे यक़ीन के साथ कह रहा हूं।”

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