अगर जीवन में सही जीवनसाथी मिल जाए, तो 14 साल का वनवास भी आसानी से कट जाता है।
एक समझदार और साथ निभाने वाला साथी जीवन की हर कठिन परिस्थिति, दुःख और चुनौतियों को साझा कर उन्हें आसान बना देता है, जबकि गलत साथी के साथ जीवन नर्क के समान हो सकता है।
जीवनसाथी के साथ से जीवन में आने वाले बदलाव:
भावनात्मक सहारा: सच्चा साथी खुशियों को बढ़ाता है और दुःख के समय में आत्मविश्वास को टूटने नहीं देता।
समान लक्ष्य: सही जीवनसाथी के साथ मिलकर सपने साकार करना और परिवार को सुखद बनाना आसान होता है।
बेहतर तालमेल: जीवन में कठिन समय, जैसे की वनवास जैसी परिस्थितियां (कठिन संघर्ष), भी सही साथी के सहयोग से कट जाती हैं।
वह आपके व्यक्तित्व का सम्मान करता है, न कि केवल आपकी छवि या स्थिति का।
शादी का मतलब एक नए परिवार का गठन है, जहाँ पति-पत्नी को अपने फैसलों, वित्तीय जरूरतों और घर की जिम्मेदारियों को खुद संभालना चाहिए, न कि माता-पिता की मेहनत की कमाई पर निर्भर रहना चाहिए।
भावनात्मक व सम्मानजनक संबंध: माता-पिता पर आर्थिक निर्भरता न होने का मतलब यह नहीं है कि उनसे रिश्ता तोड़ दिया जाए। उन्हें सम्मान, प्रेम और बुजुर्ग होने पर देखभाल की आवश्यकता होती है।
यदी आप शादी के बाद भी माता-पिता पर निर्भर रहते हैं, तो यह परिपक्वता की कमी को दर्शाता है और आपसी रिश्ते में खटास का कारण बन सकता है ओर आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाती है। शादी के बाद अपनी दाल-रोटी का जुगाड़ खुद करना, एक सुखी वैवाहिक जीवन का आधार है।
माता-पिता की भूमिका मार्गदर्शन देने की है, न कि बच्चों के लिए जीवन भर आर्थिक बोझ उठाने की। बच्चों को परिपक्व होकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए












Leave a Reply