यशोदा जयंती // यशोदा माता का प्रेम यह सिद्ध करता है कि पालने वाली माँ का स्थान जन्म देने वाली माँ से कम नहीं होता। यशोदा जी ने कान्हा को कभी भगवान नहीं समझा, यशोदा जयंती 2026: जानें कब है? और पौराणिक कथा

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यशोदा जयंती 2026: जानें कब है? और पौराणिक कथा

भारतीय संस्कृति में रिश्तों की पवित्रता और प्रेम की गहराई को त्योहारों के माध्यम से संजोया गया है। इन्हीं में से एक अत्यंत भावुक और श्रद्धापूर्ण पर्व है यशोदा जयंती। यह दिन उस माँ के जन्मोत्सव का प्रतीक है, जिसने स्वयं भगवान को अपनी गोद में खिलाया, उन्हें माखन खिलाया और यहाँ तक कि ब्रह्मांड के स्वामी को प्रेम की डोर से ऊखल तक बाँध दिया।

वर्ष 2026 में यशोदा जयंती का यह पर्व बहुत ही शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। आइए, इस ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं यशोदा जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व।
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। उत्तर भारत के राज्यों में यह तिथि फाल्गुन में आती है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में (अमांत कैलेंडर के अनुसार) इसे माघ मास में मनाया जाता है, परंतु तिथि और दिन एक ही रहता है।


षष्ठी तिथि प्रारंभ: 7 फरवरी 2026 को रात 01:18 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 8 फरवरी 2026 को रात 02:54 बजे
पूजा का समय: उदयातिथि के अनुसार, 7 फरवरी को सुबह से ही पूजा और व्रत का संकल्प लिया जा सकता है।
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श्रीकृष्ण का जन्म भले ही माता देवकी के गर्भ से हुआ हो, लेकिन उन्हें ‘यशोदानंदन’ के रूप में ही जगत जानता है। यशोदा माता का प्रेम यह सिद्ध करता है कि पालने वाली माँ का स्थान जन्म देने वाली माँ से कम नहीं होता। यशोदा जी ने कान्हा को कभी भगवान नहीं समझा

सोर्स ASTRO PAGE

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