लखनऊ के सर्राफा व्यापारी मनोज अग्रवाल जी की आत्महत्या की खबर ने पूरे व्यापारिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना हमें कई कड़वी सच्चाइयों का सामना करने के लिए मजबूर करती है:
- पुराने रेट की मार: चांदी की कीमतों में अचानक आए उछाल ने उन व्यापारियों को संकट में डाल दिया है जिन्होंने कम दाम पर भविष्य के ऑर्डर लिए थे।
- अस्थिरता का संकट: सोने-चांदी के दामों में हर रोज होने वाला बड़ा उतार-चढ़ाव छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स की कमर तोड़ रहा है।
- वायदा कारोबार का प्रभाव: व्यापारिक संगठनों का मानना है कि सट्टा और वायदा बाजार (MCX) की वजह से कीमतों में असामान्य तेजी आ रही है, जिससे कारीगर और व्यापारी बर्बादी की कगार पर हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य: आर्थिक नुकसान और सप्लाई के दबाव के कारण व्यापारी गहरे अवसाद (Depression) में जा रहे हैं, जो एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है।
क्या किया जा सकता है?
- सरकार और प्रशासन को सोने-चांदी की कीमतों में इस अस्थिरता को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
- व्यापारी भाइयों से अपील है कि कठिन समय में धैर्य रखें और आपस में संवाद करें।
- मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्थन और संसाधन प्रदान करने की आवश्यकता है।












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